पंडित जयशंकर प्रसाद की कहानी 'तितली'
पंडित जयशंकर प्रसाद की 'तितली' का सारांश (हिंदी) 'तितली' पंडित जयशंकर प्रसाद का प्रसिद्ध सामाजिक उपन्यास है। इसमें भारतीय समाज, ग्रामीण जीवन, नारी की गरिमा, प्रेम, त्याग, संघर्ष और मानवीय मूल्यों का यथार्थ चित्रण किया गया है। उपन्यास की नायिका तितली सरल, स्वाभिमानी, साहसी और संवेदनशील युवती है। वह जीवन की अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना धैर्य और आत्मविश्वास से करती है। तितली अपने आदर्शों, कर्तव्य और आत्मसम्मान से कभी समझौता नहीं करती। उसके माध्यम से लेखक ने भारतीय नारी के आदर्श स्वरूप, उसके त्याग, प्रेम और दृढ़ चरित्र को प्रस्तुत किया है यह उपन्यास केवल एक प्रेमकथा नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों, वर्गभेद और मानवीय संबंधों की गहराई को भी उजागर करता है। अंततः यह संदेश देता है कि सच्चा सुख, सम्मान और सफलता सदाचार, परिश्रम, आत्मसम्मान तथा मानवता के मार्ग पर चलने से ही प्राप्त होते हैं। तितली : प्रमुख अंश (भावार्थ सहित) 1. प्रकृति और गाँव का सौंदर्य उपन्यास के आरंभ में लेखक ने भारतीय ग्रामीण जीवन और प्रकृति का अत्यंत मनोहारी चित्रण किया है। खेत, पेड़, नदी, पक्षियो...