एक और आसमां
*एक और आसमां -
काश, आसमां के उस पार भी
एक आसमां होता,
जहाँ परिंदों को उड़ने के लिए,
एक और जहान होता।
जहाँ कोई रंग-रूप से नहीं,
सिर्फ हुनर से परिंदे की पहचान होती,
जहाँ जात-पात नहीं,
सिर्फ हौसला देखा जाता।
जहाँ बात लड़का या लड़की की न होकर,
बस हुनर की होती,
जहाँ बात सिर्फ उसकी सादगी की होती।
जहाँ खुल कर हँसने को,
बेशर्मी न कहा जाता,
और अपनी बात रखने पर,
कोई नाराज़ नहीं होता।
जहाँ उड़ान पर कोई पाबंदी न होती,
जहाँ थके हुए परिंदों के लिए,
थोड़ा सा प्यार होता।
काश एक ऐसा आसमाँ होता,
जहाँ सिर्फ और सिर्फ सुकून होता,
जहाँ हर दिल का अपना,
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