तू लिख मेरी कामयाबी पर (स्वरचित)
न तू मेरी मोहब्बत पर लिख,
न बेवफ़ाई पर लिख।
न खुशनसीबी पर लिख,
न रुसवाई पर लिख।
न तो मेरी शराफ़त पर लिख,
न लिख मेरी बेहयाई पर लिख।
लिखना है लिख मेरी कामयाबी पर।
क्योंकि मोहब्बतें टूट जाती हैं,
बेवफ़ाई के क़िस्से आम हैं।
खुशनसीबी पल भर की है,
रुसवाई ज़माने का काम है।
शराफ़त को लोग कमज़ोरी समझें,
बेहयाई पे उँगली उठाएँ।
पर कामयाबी…?
कामयाबी वो मुकाम है,
जो सारे इल्ज़ाम धो देती है।
वो आवाज़ है,
जो सारी ख़ामोशी चीर देती है।
तो छोड़ ये मोहब्बत-नफ़रत के पन्ने,
मेरे किरदार के कच्चे किस्से।
अगर कलम उठाई है मेरे लिए,
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें