क्या हम आजाद है
एक ऐसी कविता लिख पाऊं जो
*जगा दे, सोया नौजवान*
*बढ़ा दे, सम्मान*
*जो माँ, बहन, और बेटी का*
*जो सिखाए - ताकत हाथ में नहीं*
*ताकत संस्कार में होती है*
*जो गिरे हुए को उठाए*
*और उठे हुए को झुकना सिखाए*
*एक ऐसी कविता लिख पाऊं जो*
*घर की लक्ष्मी को देवी बनाए*
*गली के हर कोने को सुरक्षित बनाए*
*और हर माथे पर तिलक गर्व का लगवाए*
*जब कलम चले तो ज़ालिम कांपे*
*और बेटी बिना डर के रात में भी चले*
*तब समझूंगीमेरी कलम सार्थक हुई*
*तब समझूंगी देश सच में बदल रहा है*
*पर सवाल ये भी पूछूं
*क्या हम आजाद हैं?*
*आजाद उस दिन होंगे,*
*जब भूख, भेद और डर से भी आजाद होंगे।*
*जब तिरंगा सिर्फ 15 अगस्त को नहीं,*
*रोज़ दिल में लहराएगा।*
*जय हिंद 🇮🇳*
Meenu Sharma (delhi)
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