मीनू शर्मा कवयित्री (दिल्ली) : www.jaishankarprasad.com
" मीनू शर्मा कवयित्री (दिल्ली) "
दिल्ली की कवियत्री मीनू शर्मा: साहित्य और अभिव्यक्ति की सधी हुई आवाज :
दिल्ली की मीनू शर्मा साहित्य के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना रही हैं। वह एक कवियत्री, आवाज की कलाकार और गायिका हैं। पेशेवर रूप से वह दिल्ली के एक सरकारी विद्यालय से जुड़ी हैं और अपने कार्य के साथ-साथ लेखन में भी सक्रिय हैं।
मीनू शर्मा को कविता लिखने का शौक बचपन से ही रहा है। उन्होंने अपनी पहली कविता कक्षा 5 में लिखी थी। वहीं से शब्दों के साथ उनका संबंध शुरू हुआ, जो समय के साथ लगातार आगे बढ़ता गया। पढ़ाई और अन्य जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने लेखन की अपनी रुचि को बनाए रखा।
अब तक उनकी चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और वह अपनी पाँचवी पुस्तक लिखने की दिशा में कार्य कर रही हैं। उनकी पहली पुस्तक “मन की उड़ान” थी, जिसमें जीवन और भावनाओं से जुड़ी रचनाएँ शामिल हैं। दूसरी पुस्तक “व्यथा – मेरी अपनी” व्यक्तिगत अनुभवों और संवेदनाओं पर आधारित है। तीसरी पुस्तक “किस्से मेरे तुम्हारी” में रिश्तों और जीवन की विभिन्न स्थितियों को अभिव्यक्ति दी गई है। चौथी पुस्तक “मन की बात” विचारों और सामाजिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है।
इन चारों पुस्तकों के माध्यम से मीनू शर्मा ने अपने लेखन की एक स्पष्ट शैली विकसित की है। उनकी भाषा सहज और सीधी है, जिससे पाठकों को समझने में आसानी होती है। उनकी कविताओं में दैनिक जीवन, भावनाएँ और सामाजिक अनुभवों की झलक मिलती है।
व्यक्तिगत पुस्तकों के अतिरिक्त, मीनू शर्मा 15 अलग-अलग एंथोलॉजी में भी अपनी रचनाएँ दे चुकी हैं। विभिन्न प्रकाशनों के साथ जुड़कर उन्होंने व्यापक पाठक वर्ग तक अपनी पहुँच बनाई है। यह सहभागिता उनके निरंतर साहित्यिक योगदान को दर्शाती है।
उनकी तीसरी पुस्तक का प्रदर्शन दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर में किया गया था। यह किसी भी लेखक के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। इसी अवसर के बाद उनकी पुस्तक का चयन कोलकाता इंटरनेशनल पुस्तकालय के लिए भी किया गया। यह उनके लेखन को मिली स्वीकृति का संकेत है।
लेखन के साथ-साथ मीनू शर्मा आवाज की कला में भी सक्रिय हैं। वह मंच पर अपनी कविताओं का पाठ करती हैं और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेती हैं। एक गायिका के रूप में भी उन्होंने अपनी रुचि को आगे बढ़ाया है। उनके लिए अभिव्यक्ति केवल लिखित शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वर और प्रस्तुति के माध्यम से भी वह अपने विचार साझा करती हैं।
दिल्ली के एक सरकारी विद्यालय से जुड़ी होने के साथ-साथ साहित्य में सक्रिय रहना उनके संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है। वह अपने कार्य और रचनात्मक रुचियों दोनों को समान महत्व देती हैं।
आज जब वह अपनी पाँचवी पुस्तक की तैयारी कर रही हैं, पाठकों को उनके नए कार्य का इंतजार है। अब तक की उनकी यात्रा निरंतर लेखन, सहभागिता और अभिव्यक्ति की रही है। मीनू शर्मा का साहित्यिक सफर यह दर्शाता है कि रुचि और निरंतर अभ्यास के माध्यम से व्यक्ति अपनी अलग पहचान बना सकता है।
शीर्षक: छायावाद के पुरोधा: महाकवि जयशंकर प्रसाद जी को शत-शत नमन*
जवाब देंहटाएंकामायनी के सर्जक, आँसू के रचयिता, और हिंदी साहित्य को 'छायावाद' का गौरव देने वाले युग-पुरुष पंडित जयशंकर प्रसाद जी को सादर नमन।
जब भी हम पढ़ते हैं -
_"हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती"_
तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जब गुनगुनाते हैं -
_"अरुण यह मधुमय देश हमारा"_
तो सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
प्रसाद जी केवल कवि नहीं थे, वे एक दार्शनिक थे। उन्होंने 'कामायनी' के माध्यम से मनु, श्रद्धा और इड़ा के रूप में मन, भाव और बुद्धि का जो संघर्ष दिखाया, वह आज भी हर मनुष्य के भीतर चल रहा है। 'कामायनी' का अंतिम संदेश 'समरसता' आज के बिखरे हुए समाज के लिए सबसे बड़ी औषधि है।
'आँसू' में उन्होंने वेदना को इस तरह शब्द दिए कि हर टूटा हुआ दिल कह उठता है - _"यह मेरे ही आँसू हैं"_। 'स्कंदगुप्त' और 'चंद्रगुप्त' जैसे नाटकों से उन्होंने इतिहास को जीवित कर दिया।
छायावाद के इस स्तंभ ने हमें सिखाया कि कविता केवल तुकबंदी नहीं, आत्मा की आवाज़ है। प्रकृति का मानवीकरण, अंतर्मन की पीड़ा और राष्ट्रीय चेतना - इन तीनों को एक साथ पिरोने का हुनर सिर्फ प्रसाद जी के पास था।
आज जब हिंदी भाषा अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है, तब प्रसाद जी का साहित्य हमें याद दिलाता है कि हमारी भाषा कितनी समृद्ध, कितनी मधुर और कितनी गहरी है।
हे महाकवि, आपका एक-एक शब्द अमर है। आपने 'लहर', 'झरना', 'आँसू' देकर हिंदी को जो सौंदर्य दिया, उसके लिए साहित्य जगत सदैव आपका ऋणी रहेगा।
*विनम्र श्रद्धांजलि।*
_"ले चल वहाँ भुलावा देकर, मेरे नाविक धीरे-धीरे"_
आपकी लेखनी की नाव आज भी हमें भाव-सागर में ले जाती है प्रसाद जी।