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शीर्षक: छायावाद के पुरोधा: महाकवि जयशंकर प्रसाद जी को शत-शत नमन*

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  शीर्षक: छायावाद के पुरोधा: महाकवि जयशंकर प्रसाद जी को शत-शत नमन * कामायनी के सर्जक, आँसू के रचयिता, और हिंदी साहित्य को 'छायावाद' का गौरव देने वाले युग-पुरुष पंडित जयशंकर प्रसाद जी को सादर नमन। जब भी हम पढ़ते हैं -  _ "हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती" _   तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जब गुनगुनाते हैं -  _ "अरुण यह मधुमय देश हमारा" _   तो सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। प्रसाद जी केवल कवि नहीं थे, वे एक दार्शनिक थे। उन्होंने 'कामायनी' के माध्यम से मनु, श्रद्धा और इड़ा के रूप में मन, भाव और बुद्धि का जो संघर्ष दिखाया, वह आज भी हर मनुष्य के भीतर चल रहा है। 'कामायनी' का अंतिम संदेश 'समरसता' आज के बिखरे हुए समाज के लिए सबसे बड़ी औषधि है। 'आँसू' में उन्होंने वेदना को इस तरह शब्द दिए कि हर टूटा हुआ दिल कह उठता है - _ "यह मेरे ही आँसू हैं" _ । 'स्कंदगुप्त' और 'चंद्रगुप्त' जैसे नाटकों से उन्होंने इतिहास को जीवित कर दिया। छायावाद के इस स्तंभ ने हमें सिखाया कि कविता केवल तुकबंदी न...

मीनू शर्मा कवयित्री (दिल्ली) : www.jaishankarprasad.com

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  www.jaishankarprasad.com " मीनू शर्मा कवयित्री (दिल्ली) " दिल्ली की कवियत्री मीनू शर्मा: साहित्य और अभिव्यक्ति की सधी हुई आवाज : दिल्ली की मीनू शर्मा साहित्य के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना रही हैं। वह एक कवियत्री, आवाज की कलाकार और गायिका हैं। पेशेवर रूप से वह दिल्ली के एक सरकारी विद्यालय से जुड़ी हैं और अपने कार्य के साथ-साथ लेखन में भी सक्रिय हैं। मीनू शर्मा को कविता लिखने का शौक बचपन से ही रहा है। उन्होंने अपनी पहली कविता कक्षा 5 में लिखी थी। वहीं से शब्दों के साथ उनका संबंध शुरू हुआ, जो समय के साथ लगातार आगे बढ़ता गया। पढ़ाई और अन्य जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने लेखन की अपनी रुचि को बनाए रखा। अब तक उनकी चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और वह अपनी पाँचवी पुस्तक लिखने की दिशा में कार्य कर रही हैं। उनकी पहली पुस्तक “मन की उड़ान” थी, जिसमें जीवन और भावनाओं से जुड़ी रचनाएँ शामिल हैं। दूसरी पुस्तक “व्यथा – मेरी अपनी” व्यक्तिगत अनुभवों और संवेदनाओं पर आधारित है। तीसरी पुस्तक “किस्से मेरे तुम्हारी” में रिश्तों और जीवन की विभिन्न स्थितियों को अभिव्यक्ति दी गई है। चौथी ...